राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय स्त्तर पर हिन्दी व्याकरण में “पद परिचय” का प्रयोग एवं विश्लेषण 5/5 (2)

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डॉ० नरेश कुमार

दूरभाष क्रमांक : 09991996636

संक्षिप्तिका :-

मानव जीवन में शिक्षा ज्ञान अर्जन एवं सर्वागीण विकास की सत्तत प्रक्रिया है। यह मानव के जीवन को सशक्त एवं समृद्ध बनाती है। शैक्षिक ज्ञान के बिना मानव का जीवन अंधकारमय होता है। वह जगत् में पशु के समान विचरण करता है। महात्मा गांधी जी के अनुसार शिक्षा मानव का अध्यात्मिक, सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक विकास करती है। प्राचीन काल से शिक्षा  की महत्ता पर बल प्रदान किया गया है। इसका आधार भारतीय संस्कृति के आधार भूत ग्रन्थ वेद, उपनिषद्, पुराण एवं रामायण महाभारत आदि थे।  छात्रों को शिक्षित करने के लिये गुरुकुल में भेजा जाता था। वहाँ से शिक्षित होने के पश्चात् छात्र गपने आगामी जीवन का प्रारम्भ करता था।

आधुनिक संदर्भ में शिक्षा के क्षेत्र में महत्त परिवर्तन हुआ है। शिक्षा को अब रोजगार की दृष्टि से मानित किया जाता है। सरकारी संस्थाओं में बच्चों को न भेजकर प्राईवेट स्कूलों में भेजा जाता है। जहाँ पर छात्र केवल पुस्तकों तक सीमित रह जाता है। अनेक बार स्वाध्याय करने पर भी वह व्याकरण के नियमों का स्मरण करने में असमर्थ होता है। व्याकरण किसी भी भाषा को आत्मसात् करने का मूल आधार होता है। इसके बिना किसी भी भाषा के साहित्य को समझना दुष्कर कार्य है। व्याकरण वह शास्त्र है – जो हमें शुद्ध और अशुद्ध का ज्ञान करवाते हुए भाषा के परिष्कृत नियमों  का ज्ञान करवाता है।

प्रस्तुत शोध पत्र हिन्दी व्याकरण के पद परिचय को केन्द्र में रखकर लिखा गया है। इसका उद्देश्य राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पर छात्रों एवं छात्राओं द्वारा की जाने वाली अशुद्धियों स्पष्ट करने के संदर्भ में लिखा गया है। इसको जानकर छात्र परीक्षा में व्याकरण के विधा पद परिचय लेखन कदापि अशुद्धियाँ नही करेंगे, ऐसा लेखन का मनतव्य है।

संकेतक :- संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण,क्रिया विशेषण, संबंधबोधक, समुच्चय्बोधक, विस्मयादिबोधक एवं पद परिचयों के नियम ।

विषयवस्तु :-   हिन्दी भाषा में लेखन कार्य करते समय वाक्यों में प्रयुक्त होने वाले शब्दों को पद कहते हैं। इसमें संज्ञा, सर्वमाम , विशेषण, क्रिया एवं संबंधबोधक, समुच्चय्बोधक, विस्मयादिबोधक आदि का परिगणन किया जाता है। इनके स्पष्ट ज्ञान होने पर छात्र वाक्य लेखन में अशुद्धियाँ नही करता है। उसकी समझ स्पष्ट होने पर स्वयं प्रत्येक वाक्य में संज्ञा पद, क्रिया पद, विशेषण आदि की पहचान कर लेता है।    इस प्रकार स्पष्ट है – वाक्यों में आने वाले पदों का व्याकरण के मत में परिचय देना ही पद परिचय कहलाता है।  बोर्ड़ की परीक्षाओं में इससे संबन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं। छात्र अभ्यास के बिना सरलता से हल नही कर सकता है।अत: उसको सर्वप्रथम परिभाषा गत ज्ञान होना आवश्यक है-

  • संज्ञा :- किसी वस्तु, स्थान, व्यक्ति के नाम या भाव का ज्ञान होना।
  • सर्वनाम :- संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त शब्द ।
  • विशेषण :- जो संज्ञा और सर्वनाम की विशेषता प्रकट करने वाले शब्द।
  • क्रिया :- जिसमें वाक्य कार्य के होने का बोध हो।
  • क्रिया विशेषण :- जो क्रिया की विशेषता प्रकट करता है।
  • संबंधबोधक :-संज्ञा और सर्वनाम के बाद आकर उनका संबंध वाक्य के अन्य शब्दों के साथ प्रकट करने वाले अव्यय शब्दों को।
  • समुच्चयबोधक :-दो शब्दों, वाक्यांशों और वाक्यों को जोड़ने वाले शब्द ।
  • विस्मयादिबोधक :-जो अव्यव शब्द विस्मय, प्रशंसा, प्रसन्नता, शोक और घृणा आदि भावों कि प्रकट करते हैं।

पद परिचयों का संक्षिप्त विवेचन :-

1.संज्ञा पद परिचय:- किसी भी वाक्य में आने वाले संज्ञा पदों का प्रयोग स्पष्ट करना ही संज्ञा पद परिचय कहलाता है।

  • नियम :- इसमें संज्ञा पद का वर्णन स्पष्ट दिखाई पड़ता है।
  • उदाहरण :- राम कक्षा में सर्वश्रेष्ठ छात्र है।
  • वाक्यबोध :- राम : संज्ञा व्यक्तिवाचक, पुल्लिंग, एकवचन, कर्ता कारक ।

इसी प्रकार अन्य वाक्यों का भी निर्माण किया जाता है।  गीता ईमानदार लड़की है।

  • वाक्यबोध :- गीता : संज्ञा व्यक्तिवाचक, स्त्रीलिंग, एकवचन, कर्ता कारक ।

2.सर्वनाम पद परिचय:- जिस वाक्य में जिस शब्द को संज्ञा के स्थान पर प्रयोग किया जाता है। वह सर्वनाम पद परिचय कहलाता है।

  • नियम :- इसमें संज्ञा के स्थान पर सर्वनाम शब्द का प्रयोग स्पष्ट दिखाई देता है।
  • उदाहरण :- वे स्कूल जा रहे हैं।
  • वाक्यबोध :- वे : सर्वनाम पद, अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम, पुल्लिंग, बहुवचन,कर्ता कारक ।

3.विशेषण पद परिचय:- किसी भी वाक्य में जब संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द का प्रयोग किया जाता है। वह विशेषण पद परिचय कहलाता है।

  • नियम :- इसमें संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाला शब्द स्पष्ट दिखाई देता है।
  • उदाहरण :- मोनिका लाल गुलाब पसन्द करती है।
  • वाक्यबोध :- लाल : विशेषण, गुणवाचक विशेषण,स्त्रीलिंग, बहुवचन, गुलाब संज्ञा की विशेषता है।

4.क्रिया पद परिचय:- किसी भी वाक्य में क्रिया का परिचय होना ही क्रिया पद परिचय कहलाता है।

  • नियम :- इसमें क्रिया पद स्पष्ट दिखाई देता है।
  • उदाहरण :- कर्मचारी आपस में बातें कर रहे हैं ।
  • वाक्यबोध :- बाते करना : क्रिया पद, अकर्मक क्रिया, भूतकाल, पुल्लिंग, बहुवचन, कर्तृवाच्य।

5.क्रिया विशेषण पद परिचय :- किसी भी वाक्य में क्रिया के विशेषण पद का परिचय होना ही क्रिया विशेषण पद परिचय कहलाता है।

  • नियम :- इसमें क्रिया विशेषण पद स्पष्ट दिखाई देता है।
  • उदाहरण :- कविता धिरे-धिरे गीत गा रही है।
  • वाक्यबोध :- धिरे-धिरे : क्रिया विशेषण, गा रही है, क्रिया की विशेषता।

6.संबंधकबोधक पद परिचय:- किसी भी वाक्य में संबंध के बोध का परिचय होना ही संबंधबोधक पद परिचय कहलाता है।

  • नियम :- इसमें संबंधबोधक पद स्पष्ट दिखाई देता है।
  • उदाहरण :- प्रदीप के बिना कविता खाना नही खायेगी।
  • वाक्यबोध :- के बिना : संबंधबोधक, प्रदीप औअ कविता में संबंधसूचक।

7.समुच्चयबोधक पद परिचय:- किसी भी वाक्य में समुच्चयबोधक पद का परिचय होना ही समुच्चयबोधक पद परिचय कहलाता है।

  • नियम :- इसमें समुच्चयबोधक पद स्पष्ट दिखाई पड़ता है।
  • उदाहरण :- दीपावली पर हम स्कुटर खरीदेंगे या मोटरसाईकल लेंगे।
  • वाक्यबोध :- या : समुच्चयबोधक, समानाधिकरण, उपवाक्यों को सयुंक्त करना।

8.विस्मयादिबोधक पद परिचय:- किसी भी वाक्य में विस्मयादिबोधक पद का परिचय होना ही विस्मयादिबोधक पद परिचय कहलाता है।

  • नियम :- इसमें अनेक प्रकार के विस्मयादिबोधक शब्द स्पष्ट दिखाई पड़ते हैं।
  • उदाहरण :- अरे ! कितना बड़ा सर्प है।
  • वाक्यबोध :- अरे : विस्मयादिबोधक शब्द, सम्बोधन के भाव को दर्शाने वाला।

इस प्रकार से पद परिचयों का हिन्दी व्याकरण में सवर्त्र प्रयोग किया जाता है।  इनका सतत अभ्यास करना छात्रों के लिये अनिवार्य है।

हिन्दी व्याकरण में संज्ञा पद, सर्वनाम पद, क्रिया पद, विशेषण पद, क्रिया विशेषण पद, संबंधबोधक पद, समुच्चयबोधक और विस्मयादिबोधक पदों प्रयोग करने से भाषा में स्पष्टता आती है। इनका अभ्यास परिचय अनिवार्य है।   पद परिचयों के नियम एवं अभ्यास :-  पद परिचयों का अभ्यास हेतु अधोलिखित नियमों का पालन करना अनिवार्य है।

  • संज्ञा पद :- संज्ञा के भेद, लिगं का ज्ञान,वचन,क्रिया के साथ संबंध।
  • सर्वनाम पद :- सर्वनाम के भेद,पुरुष, लिंग, वचन, कारक, क्रिया के साथ संबंध का ज्ञान ।
  • विशेषण पद :- विशेषण भेद,लिंग,वचन, विशेष्य का वर्णन।
  • क्रिया पद :- क्रिया का भेद,लिंग, वचन, पुरुष,धातु, काल का प्रयोग।
  • क्रिया विशेषण पद :- क्रिया विशेषण के भेद।
  • समुच्चयबोधक पद :- समुच्चयबोधक पद के भेद।
  • संबंधबोधक पद :- संबंधबोधक के भेद ।
  • विस्मयादिबोधक पद :- विस्मयादि पदों का ज्ञान ।

निष्कर्ष :- अन्त में स्वयं सिद्ध होता है कि हिन्दी व्याकरण में प्रयुक्त पद परिचय का ज्ञान करवाना छात्रों के लिये अत्यधिक अनिवार्य है। व्याकरण के इन बिन्दुओं को आत्मसात् किये बिना छात्र अपने लेखन कार्य सदा अशुद्धि करता है। प्रस्तुत शोधपत्र  के नियमों और सूत्रों के अभ्यास से छात्रों को अत्यधिक लाभ मिलेगा।

संदर्भ ग्रन्थ सूची :-

1.भाषा अधिगम एवं व्याकरण, डॉ० देवेन्द्र शर्मा एवं डॉ० अंजु शर्मा, प्राची (इण्डिया) लिमिटेड़, इन्द्रलोक, दिल्ली, 2010

  1. हिन्दी भाषा का आधुनिक विकास, रवीन्द्र कात्यान, मुम्बई-2006

3.हिन्दी भाषा का व्याकरण, डॉ० रमेश चन्द्र दाश, ईस्ट्रन बुक लिंकर्स, नई दिल्ली, 2008 ॥

 

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