Home Blog हुतात्मा भक्त फूलसिंह जी

हुतात्मा भक्त फूलसिंह जी

हुतात्मा भक्त फूलसिंह जी

हमारे आदर्श हमारे पूर्वज

हुतात्मा भक्त फूलसिंह जी (माहरा सोनीपत)

लेखक :- श्रद्धेय ओमानन्द जी महाराज

प्रस्तुति :- अमित सिवाहा

हैदराबाद रियासत के आर्य सत्याग्रह में हरयाणा प्रान्त नेे जो भाग लिया वह भारत के सब प्रांतो से बढ़कर था। उसका विशेष श्रेय पूज्य भक्त जी महाराज की कार्यकुशलता व प्रभाव को ही समझना चाहिए। इसी लिए सत्याग्रह की समाप्ती पर महाशय कृष्ण ने विनोद में कहा था कि — ” जब भक्त फूलसिंह जैसे फरिश्ते आर्यसमाज में विद्यमान हैं तब हमको जेल में कौन बन्द रख सकता है ?”

समस्त हरियाणे में जिस किसी दुखिया को कहीं भी शरण नहीं मिलती थी वह अन्त में भक्त जी महाराज की शरण में आता था और अपनी सारी शक्ति लगाकर उसके दुख निवारण की चेष्टा करते थे। ऐसे ही दुखी जनों में मोठ (जिला हिसार) के हरिजन बन्धु थे जिनका कुआं मुसलमान रांघड़ो ने बनता बनता बन्द करवा दिया था। मोठ के हरिजन भाई सब जगह से निराश होकर अन्त में भक्त जी की शरण में आये और अपनी कष्ट गाथा सुनाई। भक्त जी महाराज ने आश्वासन दिया कि कुछ दिन ठहरो भगवान् की कृपा से आपका सब मनोरथ पुरा हो जाएगा।

कुछ समय पश्चात् बीना किसी को सूचना दिये एक व्यक्ति के साथ 1 सितम्बर 1940 को गांव मोठ में पहुंच गए। तीन दिन तक ग्रामवासियों को समझाते रहे किन्तु मुसलमान नहीं माने। अन्त में उन सबके सामने आमरण अनशन व्रत कर दिया ” अर्थात् कुआ बनने पर ही अन्न ग्रहण करुंगा अन्यथा यहीं प्राण त्याग दूंगा “! इसका भी मुसलमानों पर कोई प्रभाव नहीं हुआ और भक्त जी महाराज को तीन चार दिन बाद वहां से उठाकर जंगल में ले जाकर अधमरा करके डाल आये। उस रात जो उन्हें यातनायें मुसलमानों द्वारा सहनी पड़ी वे वर्णानातीत है। ईश्वर की कृपा से से अन्त में 23 दिन के उपवास के बाद समस्या हल हो गई। कुआ की समाप्ती पर श्री भक्त जी महाराज को महात्मा गांधी जी से मिलने के लिए दिल्ली बुलाया और डेढ़ घण्टे तक वार्तालाप किया उस वार्तालाप में अपना अनुयायी बनाने का पूर्ण प्रयत्न किया, परंतु असफल रहे।

गांधी जी के कहने का मुख्य सार यही था — आप आर्यसमाज के दायरे से निकल कर मेरे प्रोग्राम के अनुसार कार्य कीजिये। समय समय पर मैं भी आपको यथाशक्ति सहायता देता रहूंगा। इससे आप देश की अधिक सेवा कर सकेगें।

भक्त जी महाराज ने छल कपट रहित और सीधी सादी भाषा में उत्तर दिया — महात्मा जी मैं आप की सब आज्ञाओं को मानने के लिए तैयार हूं परन्तु आर्यसमाज को नहीं छोड़ सकता क्योकिं “महर्षि दयानंद और आर्यसमाज तो मेरे रोम रोम में रम चुके हैं वे इस जन्म में तो निकाले से भी नहीं निकल सकते”। जिस महात्मा जी को लोग जादूगर कहते थे उनका जादू दयानंद के शिष्य पर असफल रहा।

भक्त जी का दृढ़ विश्वास था कि “”संसार का भला भगवान् दयानंद जी के बताये हुए रास्ते पर चलने से ही हो सकता है”। दुनियां में अगर सुख शान्ति की वर्षा हो सकती है तो महर्षि दयानंद के द्वारा दिखाये हुए सत्य मार्ग पर चलने पर ही हो सकती है “।

उनके सर्वतोमुखी कार्यों में नारी जाति की उन्नति भी एक कार्य था। इसके लिये उन्होनें एक कन्या पाठशाला की स्थापना भी की जो जींद में कई वर्षों तक चलती रही परन्तु वहां वह स्थिर न हो सकी। अन्त में गांव खानपुर कलां जिला सोनीपत में उसकी स्थिर नींव रखी जो बढ़कर कन्या गुरुकुल खानपुर कलां के नाम से विख्यात हुई। आज युनिवर्सिटी के रुप में पूरे विश्व के लिए प्रेरणा बन गई है। इन सब कार्यों को देखते हुए सन् 1942 में श्रावण सुदा द्वितीया को रात के साढ़े नौ बजे मशरुफ गुण्डे चार मुसलमानों की गोली से वीरगति को प्राप्त हुए। इस प्रकार के त्यागी, कर्मनिष्ठ, तपोधन आर्यसमाज में भगवान् फिर से पैदा कर। श्री भक्त जी के यशोगान में उनके भक्त कुँवर जौहरी सिंह जी प्रेरक रचना है —

छोड़ कर पटवार सबकी रिश्वत उल्टी फेर दी।। टेक।।

धरती धन कै ठोकर मारी, भरी जवानी याद है।

क्या तुझे भक्त फूलसिंह की वो कहानी याद है।। 1।।

1919 में जंगल में मंगल कर दिया,

भैंसवाल का गुरुकुल देखो, बस निशानी याद है।।

क्या तुझे भक्त…….।। 2।।

कितने ऐसे काम हैं जो अब बता सकता नहीं,

उजड़े घर को बसा गया वो मेहरबानी याद है।।

क्या तुझे भक्त…….।। 3।।

पारसमणि गई भूल में, बड़ी खुशबू टूटे फूल में,

“जौहरी सिंह” अमर हो गए गीता की बानी याद है।।

क्या तुझे भक्त……।।4।।

श्री भक्त फूलसिंह जी महाराज का फोटो “भक्त फूलसिंह जीवन चरित” नामक पुस्तक से लिया है। ये फोटो गुरुकुल भैंसवाल के पहले तीन स्नातकों के साथ लिया गया था। इस पुस्तक के लेखक पंडित विष्णुमित्र विद्यामार्तण्ड जी हैं। ये पुस्तक भक्त जी के भक्त श्री योगेन्द्र शास्त्री भैंसवाल कलां वालों के पास आभुषणों की तरह सुरक्षित रखी है। मुझे ये दुर्लभ पुस्तक पढ़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। शास्त्री जी का बहुत बहुत धन्यवाद।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here